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सोनिया गांधी की अध्यक्षता में विपक्षी दलों की मीटिंग...पढ़ें, क्या रहा खास

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के बीच शुक्रवार को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में विपक्षी दलों की बैठक आयोजित हुई। बता दें कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान हुई इस बैठक में 22 दलों के नेताओं ने भाग लिया था।

बैठक में सभी ने सर्वसम्मत से अम्फान चक्रवात से ओडिशा व पश्चिम बंगाल में हुई तबाही पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुये इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने को लेकर केंद्र सरकार से मांग की है।

विपक्षी दलों के साथ हुई बैठक के दौरान सोनिया गांधी ने कोरोना (corona) संकट को लेकर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा और जारी हुये आर्थिक पैकेज को देश के साथ एक क्रूर मजाक करने जैसा बताया है। 

बता दें कि बसपा (bsp), सपा (sp) और आप (aap) इस बैठक में शामिल नहीं हुई। करीब 4 घंटे तक चली इस बैठक के बाद सभी 22 दलों के नेताओं संयुक्त रूप से 11 बिंदु का डिमांड चार्टर जारी कर कई मांगों को उठाया गया है।

* आयकर दायरे में नहीं आने वाले सभी परिवारों को 7500 रुपये अगले 6 महीने तक दिए जाएं। जिसमें से 10000 हजार रुपये की एकमुश्त तत्काल मदद दी जाए। 

* सोनिया गांधी ने कहा कि विपक्ष के तमाम दलों की ओर से सरकार से मांग की गई कि गरीबों के पास तत्काल नकदी पहुंचनी चाहिए। सभी परिवारों को मुफ्त राशन दिया जाए। प्रवासी मजदूरों को उनके घर जाने के लिए बस और ट्रेन मुहैया करवाई जाए।

* हर जरूरतमंद को छह महीने तक मुफ्त 10 किलो राशन दिया जाए। साथ ही मनरेगा का कार्यदिवस 200 दिन किया जाए। प्रवासी मजदूरों की निशुल्क घर वापसी का इंतजाम करने के साथ-साथ विदेशों में फंसे छात्र-छात्राओं और भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। श्रम कानूनों में की जा रही मनमानी बदलावों को रद्द किया जाए।

* रबी की फसलों की एमएसपी पर खरीद हो और खरीफ फसलों के जरूरी कीटनाशक, खाद-बीज का पूरा इंतजाम हो। कोरोना की लड़ाई प्रांतीय और जिला स्तर पर लड़ी जा रही है, इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि प्रांतीय सरकारों को विशेष राहत पैकेज दे। 

* केंद्र सरकार लॉकडाउन से बाहर निकलने की रणनीति और नीति बताए, संसद और संसदीय समितियों की कार्यवाही शुरू की जाए, सरकार घोषित राहत पैकेज पर पुनर्विचार कर दोबारा से निर्णायक मदद वाला पैकेज दे और अंतर्राष्ट्रीय वह अंतर्राज्यीय हवाई सेवा शुरू करते हुए राज्य सरकारों से आवश्यक विचार विमर्श करे। 

* इसके पहले सर्वसम्मत से अम्फान चक्रवाती तूफान से हुई तबाही को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पास किया और ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल को आर्थिक मदद देने की केंद्र से मांग की।

* उन्होंने कहा कि नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण जीएसटी लागू करने के चलते देश की अर्थव्यवस्था पर कोरोना आने से पहले ही संकट छा गया था। 2017-18 में ही अर्थव्यवस्था गिरने लगी थी। सात तिमाही तक लगातार जीडीपी में गिरावट कोई सामान्य बात नहीं थी, फिर सरकार अपनी गलत नीतियों के साथ आगे बढ़ती रही। 

* उन्होंने कहा कि 21 दिन में इस महामारी से जंग जीत लेने का प्रधानमंत्री का अंदाजा गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस तब तक रहेगा, जब तक कि वैक्सीन नहीं बन जाती। 

* उन्होंने कहा कि कोरोना जांच और जांच किट के आयात के मामले में भी सरकार फेल रही। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की हालत बेहद खराब है। हर बड़ा अर्थशास्त्री यही सलाह दे रहा है कि सरकारी प्रोत्साहन की तत्काल जरूरत है। 

* लाखों प्रवासी मजदूर और उनके बच्चे बिना पैसे, भोजन और दवाओं के सैकड़ों किलोमीटर पैदल अपने घरों को जाने को मजबूर हुए। कृषक मजदूरों, भूमिहीन किसान, दुकानदार, कारोबारी, स्वरोजगार 13 करोड़ परिवारों, 6.3 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम (एमएसएमई) में काम करने वाले 5.8 करोड़ कर्मचारियों की सरकार ने बड़ी क्रूरता से अनदेखी की।

* हम सभी ने सरकार को इससे निपटने में पूरा सहयोग और समर्थन की बात कही। यहां तक कि 24 मार्च को लॉकडाउन घोषित करने का भी हमने समर्थन किया। दुखद स्थिति यह कि सरकार ने ना तो पहले से कोई तैयारी की और ना ही अब इससे बाहर निकलने की उसकी कोई तैयारी दिखती है।

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